Thursday, June 22, 2017

Sun Charkhe Di Mithi Mithi Hook" Sung by Ustad Nusrat Fateh Ali Khan Sahib

Kapil Jain's Understanding & Translation of "Sun Charkhe Di Mithi Mithi Hook"
Sung by Ustad Nusrat Fateh Ali Khan Sahib, Poet : Unknown, seems to be a folklore ( further update Welcome )

सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा
मेरे दिल विचहो उठती ऐ हूँक
माहिया मैनू याद आवंदा

मेरी ईद वाला चन कदों चढ़ेगा
अल्लाह जाने माही कदों वेडे वड़ेगा
दुख ढाडे ने ते , ज़िन्दहि मलूक

माही आवेगा ते , खुशियाँ मनवांगी ,
उदेहे राहाँ विच अखियाँ विछावंगी ,
जाँन छडीये है विछोरोएँ ने फूंक ,

ताने मारदे ने अपने शरिक वे
लिख चिट्ठी विच औन दी तरिक वे
काली रात वाली डंगे मैनु शूक

कता पूरियाँ ते हंजु मेरे वघदे
हुन हासे वि नही मैनू चंगे लगदे
किवेएँ भुल जवां उदे मैं सलूक

सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा

__________________

सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा
मेरे दिल विचहो उठती ऐ हूँक
माहिया मैनू याद आवंदा

Sweet melodious sound of spinning wheel reminds me of my beloved , who is away from home , it erupts  inconsolable feeling of remembrance of my beloved

__________________

मेरी ईद वाला चन कदों चढ़ेगा
अल्लाह जाने माही कदों वेडे वड़ेगा
दुख ढाडे ने ते , ज़िन्दहि मलूक

When the moon ( beloved )  sighting signling the beginning of celebrations will appear ? God knows , when beloved enters back in home ? Enormous suffrings , life like a hell without beloved

__________________

माही आवेगा ते , खुशियाँ मनवांगी ,
उदेहे राहाँ विच अखियाँ विछावंगी ,
जाँन छडीये है विछोरोएँ ने फूंक

Will celebrate when beloved return ,
Will lay down my eyes to decorate the return passage  ,  soul almost burned in the intense heat of separation.

__________________

ताने मारदे ने अपने शरिक वे
लिख चिट्ठी विच औन दी तरिक वे
काली रात वाली डंगे मैनु शूक

Consistent teasing by relatives , please write back the date of your return , each black night ( night without beloved ) bites me with venom.

__________________

कता पूरियाँ ते हंजु मेरे वघदे
हुन हासे वि नही मैनू चंगे लगदे
किवेएँ भुल जवां उदे मैं सलूक

While spinning the wheel , my tears were unstoppable , these days laughter hurts enormously  , how could I forget beloved's behaviour.

__________________

सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा
मेरे दिल विचहो उठती ऐ हूँक
माहिया मैनू याद आवंदा

Sweet melodious sound of spinning wheel reminds me of my beloved , who is away from home , it erupts  inconsolable feeling of remembrance of my beloved

__________________
(c) (r) (p) all rights reserved

Kapil Jain
Kapilrishabh@gmail.com
Jun, 22,  2017
Noida, Uttar Pradesh, India

Thursday, June 15, 2017

Aadhaar Biometric Data, lock / unlock ? When? Why? Where?

Aadhaar Biometric Data, lock / unlock ?  When?  Why?  Where?

Sharing From my own today's experience,
As a new era of Aadhar linked biometric verification begins & we all are not very familiar with the nuance or finer aspects of these verification, if misused, can cause us financial loss etc. etc., flip side is if we want to get these verified but failed then also a big problem.

Today's Example
Now as per Govt., Now it is mandatory to link Mobile Sim with Aadhaar,

Today my finger print matching failed  Both at Airtel as well as on Vodafone ( as my two numbers) ,

Reason being :
Because I have locked myself earlier ( way back about two years due to some media reports about data theft ) on the Aadhar website link below, but funny part is, I just forgot that I have locked biometric verification myself,

After a detailed web surfing found my own fault, then I have unlocked biometric verification on the same website,

Now My Mobile Sim linked with Aadhar properly,

https://resident.uidai.gov.in/biometric-lock
_________________
Summery :

Lock : to prevent misuse

Unlock before : if want to verify your own details somewhere.
___________________
Your Aadhar details must have

1. Your Mobile number ( for OTP )

2. Your E MAIL ID

___________________

Thanks
Kapil Jain
Kapilrishabh@gmail.com

Sunday, May 21, 2017

Bharti Ji

कुछ हम क़दम बढ़ाते , कुछ तुम क़रीब आते ,
फ़ासले ज़्यादा ना थे, नीयत से ही मिट जाते !
     Bharti Chopra Ji

Sunday, May 14, 2017

Kapil's Story : Ranjish hi Sahi , Dil hi Dukhane ke liye Aaa

.
.
Kapil's Story : Ranjish hi Sahi , Dil hi Dukhane ke liye Aaa ,
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिऐ आ

राजन तुम मुझसे सत्रह साल छोटे हो , जब आखिर बार तुम आये तो तुम्हे वो बात नही कहनी चाहिये थी , माँ ने मामा को गिला शिक़वे के लहज़े में कहा , अभी मामा जी को आये पाँच मिनट भी नही हुए थे , सिर्फ पानी ही उनकी ख़ातिर में आया था , मामा जी ने माँ के लहज़े मे झुपी नाराज़गी को तुरंत भाँपते हुए पूछा , कौन सी बात बहनजी ? , मै कुछ समझा नही , वो हैरान परेशान , तब तक माँ भी भूल गयी कौन सी बात , बोली खैर छोड़ो उस बात को , यह बताओ , तुम इतने इतने दिन हो जाते है मिलने भी नही आते ,  मामा जी बोले बहनजी अभी पिछले महीने ही तो आया था , राजन अब तुम भी मुझे दिन गिना रहे हो , यह अब तक का तीसरा गिला शिकवा था माँ का मामा जी के प्रति , जिनका आगमन हुए अभी सिर्फ दस मिनट ही हुऐ थे ।

मुझे बहन-भाई के इस बातचीत का कोई सिर पैर नज़र नही आ रहा था , मैने बीच में टपकते हुऐ पूछा मामा जी आप क्या लेंगे ? मामाजी जवाब देते इससे पहले ही माँ  मुझसे बोली कामिनी को बोलो , ठंडा आम का पन्ना जो मैने बनवाया है ख़ास राजन के लिये , वो लाये , और कुछ फल कटवाओ , कितनी गर्मी में राजन आया है , उसके बाद , खाना भी , आज सिर्फ राजन की पसंद का बनवाया है , दही भल्ले इत्यादि , अब हैरान परेशान होने की मेरी बारी थी , कि माँ अपने भाई को दुलार कर रही है या गुस्सा , मामाजी परेशान हो चुके थे , उनको कुछ समझ नही आ रहा था कि उनसे कौन सी बात , कब गलत हो गयी , अपनी बड़ी बहन के प्रति | मुझको बोले कपिल , मैने बहनजी को पिछली शाम ही फ़ोन करके बताया था कि कल इतवार है , मै ग्यारह बजे आपसे मिलने नोएडा आऊंगा , उन्होंने कहा , लंच साथ करेंगे , बहुत ही ख़ुश थी फ़ोन पर | मुझे याद ही नही आ रहा कि मुझसे कोई सी बात गलत हो गयी , जिसका ज़िक्र बहनजी कर रही है , मामाजी के दबे कुचले लहज़े मे एक मासूम सी शर्मिन्दगी लिए माफ़ी की गुज़ारिश थी , जो दिल को दहलाने की कैफ़ियत रखती थी , मैने उनके दिल का मर्म समझते हुऐ कहा , मामाजी , ऐसी कोई बात नही है , तब तक माहौल पटरी से उतर चुका था , मामाजी का मूड ख़राब सा हो गया था , अपने भाई का उतरा चेहरा देख , माँ तुरंत बड़ी बहन की मुद्रा में बोली , राजन , आम का पन्ना लो इत्यादि इत्यादि , सब बेअसर,  उसके बाद मामाजी एक डेढ घंट बामुश्किल गुजारा , और भारी मन से चले गये ।

पिछले एक महीने मे लगभग तीसरी चौथी बार , यही नाटकीय परिस्थिति , क़िरदार बदल बदल के हुई , रीता दीदी , सुजाता दीदी , कांता मौसी , और आज राजन मामाजी , सब आये बढ़िया मूड़ में माँ से मिलने , सबकी आने की इत्तला पहले से थी , उनके आते ही माँ द्वारा उनके प्रति शिकायतों का अंबार , इसके बाद उनके पसंदीदा व्यंजओ से सजी टेबल और उनका भारी मन से अपने घर के लिये प्रस्थान , और उसी शाम उसी क़िरदार से फ़ोन पर लंबी बात जिसमे माँ का पूरी तरह वात्सल्यता से परिपूर्ण , आशीर्वादों से भरा और उस क़िरदार की तारीफों का तांता , घण्टों चलते फ़ोन से उस दिन का अंत , मेरे अनुमान अनुसार उस क़िरदार का वो सारा दिन बर्बाद , ना तो वो माँ को कुछ कह सके , ना कुछ कर सके , इधर माँ को उस शाम को बैचैनी की , मैंने उस क़िरदार को क्यों इतनी बाद सुनाई ।

बकौल फैज़ अहमद फैज़ ,
’वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था ,
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है ,

घर का सारा माहौल बहुत ही बोझिल था , एक अजीब सी किचकीची फिज़ा मे थी , माँ तो कभी भी ऐसी नही थी , यह सारी समस्या लगभग पिछले एक महीने के करीब मे उजागर हुई है , क्या कारण है कोई पता नही , अभी हाल ही मे हुई सारी मेडिकल रिपोर्टो में सभी कुछ ठीक आया है , उसके बावजूद सब गड़बड़ थी ।

पच्चीस तीस दिन और गुजरे होंगे , शाम ओखला फैक्ट्री से नोएडा घर आ रहा था , जाने क्यों इतना ट्रैफिक जाम लगा था , कार का सीडी प्लेयर ऑन किया मिक्स्ड ग़ज़लों की सीडी थी , दो तीन ग़ज़ले निकली होंगी की मेहंदी हसन साहिब की दिलकश मखमली आवाज़ मे बीसियों साल पुरानी मेरी पसंदीदा ग़ज़ल अहमद फ़राज़ कृत

'रंजिश ही सही , दिल ही दुखने के लिये आ' ’
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ'

बजने लगी , यह ग़ज़ल मैने अब तक ज़्यादा नही तो भी पचासियों बार सुनी होगी ,

कुछ तो मेरे पिंदारे मोहब्बत का भ्रम रख ,
तू मुझ से खफ़ा है तो ज़माने के लिऐ आ

(पिंदारे : self esteem
At least have some consideration of my esteem my pride , even if you are annoyed with me , even than come due to social obligations.)

जैसे ही गज़ल का यह शेर बजा , एक बिजली सी कौंधी दिल में , यही हो रहा है माँ के साथ , यही हो रहा है माँ के साथ , बस यही हो रहा है , मसले का हल मिलता दिखाई दिया , अब तक ट्रैफिक जाम में धीरे धीरे से कार आगे बढ़ रही थी , पर अब प्राथमिकता इस जवलंत मसले का हल ढूंढ़ना था , मैने कार को जग़ह देख के साइड लगाया , गज़ल को ध्यानपूर्वक फ़िर सुना ,  बीसियों साल मे पहली बार समझ आयी इस ग़ज़ल की बुलंदी ,

इस ग़ज़ल मे शायर अहमद फ़राज़ ने एक ख़ास मानसिक परिस्तिथियों को इस खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है , जिसमे अकेलापन एक व्यकित्व को घेर लेता है , व्यक्ति  बिल्कुल अनजाने में इस सिंड्रोम में घिर जाता है , और दूसरे किसी भी व्यक्ति से मनमुटाव शिक़वे शिकायत इसलिये कर लेता है , कि सुलह सफ़ाई के बहाने कुछ वक्त तो और साथ व्यतीत होगा , अब मुझे सारी समस्या और हल साफ़ दिख रहे थे ।

पिछले दो महीनों से माँ के पैरों का दर्द कुछ बढ़ सा गया था, जिसकी वजह से उनका अपने कमरे से डाईनिंग टेबल तक आकर खाना लेने की हिम्मत भी कुछ टूट सी गयी थी , पहले हम सुबह का नाश्ता डाइनिंग टेबल पर साथ करते थे जिसमे कम से कम आधा घंटा साथ एन्जॉय करते थे , इस ही तरह उनका लंच डिनर भाभीजी कामिनी और बच्चों के साथ होता था , साथ बिताया समय हुआ लगभग ढाई तीन घंटे , बाकी बचे समय मे TV , किताब , इधर फ़ोन , उधर फ़ोन, बेटियां , नाती , पोते , भाई , भाभी , कहने का अर्थ सारा दिन बढ़िया गुजरता था , पर अब , नाश्ता लंच डिनर सब कमरे मे बेड पर , जिसका सीधा असर, साथ बिताते समय की ड्यूरेशन पर पड़ा जो ढाई तीन घंटे से घट कर आधा पौना घंटा रह गया , जिसका सीधा रिजल्ट था पिछले अंतरे में लिखित सिन्ड्रोम ।

सबको अनुरोध किया गया कि माँ के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय व्यतीत करे , सबने अपना अपना सहयोग देना शरू किया ,  देखते ही देखते वो दुःखद सिन्ड्रोम ग़ायब हो गया , उसके बाद माँ का फिर वही पुराने ख़ुशफ़हम व्यक्तित्व में वापस आ गयी ।

करीब दो साल बाद बयासी वर्ष की आयु मे , हॉस्पिटल के कमरे मे अपनी बहू , बेटी , नर्स और डॉक्टर साहिब से ख़ूब खिलखिलाते हुए बात करते हुऐ , एक शानदार स्वर्ग प्रस्थान प्राप्त किया , जाना सभी ने है , खिलखिलाते हुए शानदार पदवी के साथ , या ?

उसके बाद से आज तक अनगिनत बार फिर सुनी , वही ग़ज़ल  ’रंजिश ही सही , दिल ही दुखाने के लिये आ’ ,

शायर श्री अहमद फ़राज़ साहिब को सलाम
गायक श्री मेहँदी हसन साहिब को सलाम

कपिल जैन

________________________________
Kapil Jain
Kapulrishabh@gmail.com
Noida , U.P. , India
May 14 , 2017

(C) (P) (R) Reserved
________________________________

https://youtu.be/wRG2XJcmhDc

https://rekhta.org/ghazals/ranjish-hii-sahii-dil-hii-dukhaane-ke-liye-aa-ahmad-faraz-ghazals?lang=hi










Monday, May 1, 2017

Kapil Story : ’ऐसे रखेगी जैसे पिंजरे मे तोता’ Will take Care like ’Parrot in a Cage’



Kapil Story : ’ऐसे रखेगी जैसे पिंजरे मे तोता’
Will take Care like ’Parrot in a Cage’

मैं सुबह फैक्टरी जाने की जल्दी मे हबड़ तबड़ में डाईनिंग टेबल पर नाश्ते कर रहा था , तभी सीढ़ियों की घंटी बजी ,
माँ ने सीढ़ियों में झाँकते हुऐ पूछा , कौन साहब ?
 आवाज़ आयी , भाभीजी भाई साहब घर पे हैं ?
माँ ने जवाब दिया , शैलेंद्र जी , आप ऊपर आइये ना , आपके भाई साहब घर पर ही है , शैलेंद्र जी ने सीढ़ियां चढ़ते हुऐ बोले , भाभीजी आज मंदिर जी के देव दर्शन के दौरान ही विचार आया कि अपनी बड़ी बिटिया साधना के लिये आपका पुत्र कपिल बहुत ही उत्तम वर रहेगा । इसी सिलसिले मे भाई साहब से मिलने की बहुत इच्छा हुई । जैसे ही मैने यह आवाज़ सुनी , दिलोदिमाग मे एक तरंग सी उठी और पूरे ज़िस्म को पुल्कित कर गयी । मेरे लिए शादी का रिश्ता आया है , वो भी शैलेंद्र जी की लड़की साधना का , लगा लॉटरी लग गयी , शैलेंद्र जी का चाय का कारोबार था और उनका और हमारा परिवार करोल बाग के पुराने जैन ख़ानदानों में थे , उनकी दो लड़कियां बड़ी साधना और छोटी प्रज्ञा , तीसरे नंबर पर लड़का सम्यक , सारा परिवार गोरा चिटा खूबसूरत तेजस्वी और पढ़ा लिखा था ।
साधना की तो बात ही निराली थी , खूबसूरत शब्द भी उसकी शख्सियत की लिये संपुर्ण नही था , जब भी मैं उसे मंदिर जी मे देखता था , उसके बाद मुझें उसके सिवा कुछ नही दिखता था , फैक्टरी जाने की सारी हबड़ तबड़ काफूर को चुकी थी , दिल की बढी धड़कन से अगले कमरे मे पहुँचे शैलेंद्र जी और डैडी के बीच होती बातचीत सुनने की कोशिश बहुत थी, कि डैडी की आवाज़ सुनी , आओ शैलेंद्र भाई , आज कैसे रास्ता भूल गये हमारा ? दूसरी आवाज़ माँ के लिऐ थी चाय के लिये , शैलेंद्र जी ने डैडी से कहा , भाई साहब , साधना के लिऐ कपिल बाबू का रिश्ता चाह रहा हूँ , डैडी की अत्यंत खिलखिलाते हुऐ हँसने की आवाज़ आयी, बोले पहले आप बैठो तो , कुछ नाश्ता तो लो , कपिल तो अभी सिर्फ बाइस साल का है अभी से शादी की बात ? इतना सुनना था कि मेरा दिल तो धक से बैठ गया , पीछे से मेरे लिये माँ की आवाज़ आयी , जूस पूरा खत्म करना ? और कुछ चाहिये , फैक्टरी पहुँच के फ़ोन करना , मतलब साफ था कि अब रुको मत और फैक्टरी पहुँचो ।
करोल बाग से ओखला फैक्टरी का सफ़र करीब बीस किलोमीटर का था जिसमे करीब पैंतालिस मिनट लगते थे , बात सन उन्नीस सौ नब्बे की है , मोबाइल फ़ोन भी नही होते थे , पूरा सफ़र बहुत बैचैनी भरा था , डैडी ने यह क्या कहा कि सिर्फ बाइस साल का है , इतना अच्छा रिश्ता भी कोई जाने देता है क्या ? इस दुनिया मे अपने माता पिता ही काम बिगाड़ने वाले हो तो ? ना कहने से पहले पूछते तो ? हज़ारों लाखों सवाल , माँ पिताजी के लिऐ गिले शिक़वे , और ना जाने क्या क्या ? भगवान करे डैडी यह रिश्ता मान लें
फैक्टरी पहुँच कर भी पाया दिल तो घर पर ही था , अभी पौने दस बजे थे , किसी काम मे कोई मन नही लग रहा था , बार बार फ़ोन का रिसीवर उठता माँ से बात करने को , पर नही , जाने इस बैचैनी को क्या कहिये ?
प्रतिदिन माँ का दोपहर दो बजे के करीब फ़ोन आता था कि लंच खा लिया या नही ? खाना ठीक लगा या नही ? आज क्या हुआ , सवा दो बज चुके थे माँ का कोई फ़ोन नही , अब तो मुझसे रहा है नही गया , माँ से बात करने के लिऐ आज तक कभी कुछ सोचा ही नही था जितना आज ,
मैने फ़ोन मिलाया माँ ने उठाया , माँ टिन्डे की सब्ज़ी टिफन में मत दिया करो , मैने आपको पहले भी मना किया है आप मानते नही हो , आज लंच बिल्कुल मजेदार नही था , जवाब आया ठीक है , कल से ख़याल करूँगी पर बेटे भिंडी थी , दाल थी , वो तो तुझे पसंद है , कोई बात नही कल से टिन्डे नही दूंगी , फिर भी बेटे , सभी सब्जियां खानी चाहिये , आदत डालो , और कोई बात , बोली ठीक है फ़ोन रखती हूं और फ़ोन बंद , और दिल की उधेड़बुन वही की वही.
दो मिनट भी नही बीते होंगे , घंटी बजी , माँ थी लाईन पर बोली , पता है आज सुबह तेरे लिए शैलेंद्र भाई साहिब जी अपनी बेटी साधना का रिश्ता लाये थे , तेरी तो बहुत ही तारीफ कर रहे थे , तेरे डैडी को बोले कि आपके परिवार को बहुत ही पसंद करते है , तेरे डैडी ने उनका धन्यवाद करते हुए कहा की आपने हमारे बारे मे इतनी अच्छी राय रखी है कि आप रिश्ता ले कर आये , परन्तु मेरी मज़बूरी यह है कि अभी कपिल सिर्फ बाइस साल का है अभी अभी छः महीने से ही फैक्टरी जाना शुरू किया है क्योंकि अभी जनवरी मे ही मुझे हार्ट अटैक आया था डॉक्टर साहब ने अभी एक महीना और आराम के लिए कहा है इसलिये कपिल ही फैक्टरी संभाल रहा है, और काफी अच्छी तरह संभाल रहा है , एक दो साल जरा आपने पैरों पर ढंग से खड़े हो जाये फिर ही शादी की विषय मे विचार करेंगे ।
माँ ने अपनी बात खत्म की और तुरंत मेरी चुप्पि से मेरे मन की सारी उधेड़बुन को समझते हुए कहा , मुझे पता है तुझे बुरा लगा , फिर भी अभी तेरे डैडी की तबियत और संभालते ही बात आगे बढ़ाऊंगी ।
समय को मेरे लिये कुछ बेहतर ही मंजूर था , अनमने ढंग से बढ़ते बढ़ते , मैंने काम मे अपने आप को ढाल ही लिया , डैडी की तबियत कोई दिन सही , कोई दिन खराब , जुलाई मे डैडी का देहांत हो गया , उसके बाद का समय काफी तकलीफ देय रहा , बड़े भाई साहिब ने सारे परिवार को संभाला , कारोबार को संभाला , मैने फैक्टरी पूरे तन मन से संभाली , एक डेढ साल मे बाकी सब चीजे तो काबू आ गयी सिर्फ डैडी की अविश्वसनीय कमी जो आज तक है ।
एक दिन शाम घर वापस आया तो टेबल पर साधना की शादी का कार्ड देखा , मुझे तो कोई बुरा नही लगा क्योंकि एक सरसरी सी आग को लगातार हवा देकर जिंदा रखना कोई आसान काम नही , बल्कि नामुमकिंन है , और बड़ी लकीरों का खिंच जाना भी एक वज़ह होता है ,यहाँ तो डैडी का ही बीच से चला जाना था इससे बड़ा क्या हादसा होता ।
उस दिन माँ ने मुझसे सीधे आँख बात नही की , सारी बात भाँपते हुऐ मैं भी वहाँ से हट गया , माँ को भी कोई अपराधबोध भावना मे देख सकता हैं कोई ?
मैं शुरू से ही स्कूल इत्यादि में मेधावी छात्रों में रहा तो एक गुरुर या मग़रूर मुझमे आ गया था , जो मर्ज़ी कहिये मैं अपने आपको ज़मीन से सात इंच ऊपर तैरता सा चलता महसूस करता था जबकि सालों बाद हकीकत से रूबरू हुआ , की शक़्ल सूरत से बेकार , गेहुआँ स्याह रंग , पतला दुबला , सादा से चेहरे पर बड़ी बड़ी आँखे , कुल मिला कर ज़िन्दगी में कभी किसी को अपनी सूरत से आकर्षित नही किया ।
करीब उम्र चौबीस की रही होगी , उन दिनों जैसे ऊपर लिखा वो मग़रूर वाला , ज़मीन से सात इंच ऊपर तैरने वाला दिल दिमाग़ था , जिसके अनुसार रिश्ते में हमे पसंद आएगी लडक़ी तो हम हाँ करेंगे वरना रिजेक्ट , लडक़ी के पास हमे रिजेक्ट करनी की कोई पॉवर नही है , हम तो थे ही सुर्खाब के परौ से सजे हुऐ , संयुक्त राष्ट्र संघ हो या अमेरिका या सोवियत रूस , इंडिया तो अपना था ही , कोई बड़े से बड़ा नेता अपने एक हाथ की दूरी से बाहर नही था ,
और फिल्मों के अभिनेता इत्यादि तो निम्न स्तर का विषय था , इसलिए लडक़ी को विश्व स्तरीय विषयों की जानकारी होगी तो अपनी पटरी बैठेगी अन्यथा रिजेक्ट , वैसे साधना का तो सौंदर्य ही राजसी था अतः उसको इन विश्व स्तरीय विषयों की जानकारी नही भी होती तो भी कोई बात नही थी ।
शादी के रिश्ते आने शुरू हुए , बड़े भाई साहब और माँ ने बहुत संजीदगी से विचार करने शुरू किए , कोई रिश्ता साधना जैसा ना आया , या हमे नही दिखा जैसे आँखों पे साधना की ही पट्टी बँधी थी , आधे से ज़्यादा रिश्ते तो मिलने से पहले स्तर पर ही खत्म , कुछ लड़कियों को हमने रिजेक्ट किया अपने विश्व स्तरीय प्रश्नों की जानकारी के अभाव मे , साथ ही करीब दस लड़कियों ने मुझे रिजेक्ट किया इन फ़िज़ूल सवालों के वजह से , एक बार तो लड़की के घर देखने उनको देखने गए तो मुझसे मिलकर वो गयी और दूसरे कमरे में अपनी बहन से बोली , इसकी शक्ल देखो और इसके प्रश्न ।
इन दस एक लड़कियों के रिजेक्शन का असर यह हुआ कि जो मे ज़मीन से सात इंच ऊपर तैरता था अब दिमाग़ से ग़ुरूर मग़रूर सब काफूर हो चुका था , अब पैर जमीन पर थे , आईने मे अपनी असली बेरंग शक्ल साफ दिखाई दे रही थी । इस ही दौरान डैडी के बाद रुपया जो पहले पेड़ पर उगता दिखता था सड़क की धूल में एक एक पैसे की बटोर की मेहनत और सौ पैसे का एक रुपया पता चला ।
अब कभी भी रिश्ते की कोई नई बात चलती तो दिल की धड़कन में कोई घटत बढत नही होती थी , सब रूटीन जैसा लगता था , कोई ख़ुशी कोई ग़म कुछ नही । फिर मेरठ मे एक रिश्ता हुआ , न जाने क्यों टूट गया , यह भी उनकी तरफ से , शायद मेरी नियति को कुछ शानदार ही मंजूर था।
हमारे एक व्यापारी डीलर श्री नानक रोहिरा साहिब , मुझे बहुत प्यार सम्मान देते थे , बोले कपिल मैने तेरे लिए एक लड़की देख रखी है तेरी शादी तो मैं कराऊंगा , तब तक मैं भी रिश्तों की बातों का आदी हो चुका था , उन्होंने बड़े भाई साहब से बात की , बड़े भाई साहब के पास कामिनी नाम की लड़की की जन्मपत्री भेजी , उन दिनों हमारे एक दूसरे सप्लायर नाथ साहब ने कंप्यूटर पर जन्मपत्री मिलाने का काम शुरू किया था , भाई साहब ने उनके पास कामिनी और मेरी जन्मपत्री मिलने के लिये भेजी , शाम हुई तो देखा की नाथ साहब पंद्रह बीस पेज का एक प्रिंटआउट लेकर आये और बड़े भाई साहब को बोले कमाल का रिश्ता है यह छत्तीस गुण मिले हैं , यह रिश्ता छोड़ना मत । उनकी आवाज़ और बात में ना जाने क्या जादू था और नानक रोहिरा साहब की बात पर उन्हें बेहद यकीन , तुरंत इधर फ़ोन और उधर फ़ोन , पता चला मेरी सगी बड़ी बहन रीता दीदी की पहचान लडक़ी की माँ से है , एक डेट तय हुई लड़की देखने के लिये ।
हमारे घर मे एक पंड़ित जी आते थे जो हमारी सारी रिश्तेदारी मे आते जाते थे , लगभग उस समय के फेसबुक थे , उनको सब ’मौसी वाले पंड़ित जी ’ कहते थे , जन्मपत्री मिलाना , रिश्ते बताना , अच्छा बुरा वक्त बताना , काम बनाना , काम बिगाड़ना , सब उनका हुनर था ।
उस दिन पंड़ित जी आये मेरे लिये एक रिश्ता लेकर , मेरी माँ को बोले बहनजी बहुत ही अच्छा रिश्ता लाया हूं तय हुआ तो मोटी दक्षिणा लूँगा , माँ बोली बहुत अच्छा पर अभी एक बहुत ही अच्छा रिश्ता नानक साहब ने बताया है और अगले इतवार लड़की देखने जाना है , कंप्यूटर की जन्मपत्री की मिलाई की बात माँ ने गोल कर दी , पंड़ित जी का मूड़ कुछ ख़राब सा हो गया , उनका लाया रिश्ता होता तो दक्षिणा भी बढ़िया होती , बारहाल उन्होंने माँ की दी हुई कामिनी और मेरी जन्मपत्री मिलाई , बोले बहनजी पत्री तो ठीक ही मिली है छत्तीस गुण मिले है , माँ ने मन सोचा वाह कंप्यूटर ने भी छत्तीस गुण ही मिलाये थे , फिर बोली पंड़ित जी यह ’ठीक ही’ मिली है का क्या अर्थ , यह जो ठीक शब्द के साथ ही क्यों बोला आपने ? क्या कोई बात है , कामिनी कपिल को ज़िंदगी भर ठीक को रखेंगी या नही ?
पंड़ित जी का जवाब आया , जी बिल्कुल ऐसे रखेगी जैसे
' पिंजरे मे तोता '
आज हमारी शादी को लगभग पच्चीस साल होने को आये ,
आज अगर वो मौसी वाले पंड़ित जी कही मिल जाये तो चरणों को हाथ लगाकर पता करूँगा , इतनी एक्यूरेसी का राज ।
कपिल जैन with Kamini
________________________________
Kapil Jain
Kapulrishabh@gmail.com
Noida , U.P. , India
April 30 , 2017
(C) (P) (R) Reserved

Sunday, January 22, 2017

Mai Re माई री, मैं कासे कहूँ पीर, अपने जिया की,

Kapil Jain's Understanding of the
"Mai Re" माई री, मैं कासे कहूँ पीर, अपने जिया की,
माई री, highly intense poem by
Majruh Sultanpuri Sahib from Movie 'Dastak', This Template Audio Sung By
Music Director Madan Mohan Sahib Ji
for the Guidance to Lata Mangeshkar Sahiba, who recorded actual music score. ( No video )

माई री, मैं कासे कहूँ पीर, अपने जिया की, माई री,
Oh My Mother, To Whom
I Share the Distress of my heart?
________________________________
हाँ
माई री, मैं कासे कहूँ पीर, अपने जिया की,
माई री,

ओस नयन की उनके,  मेरी लगी को बुझाये ना,
तन मन भीगो दे आके, ऐसी घटा कोई छाये ना,
मोहे बहा ले जाये, ऐसी लहर कोई आये ना,
ओस नयन की उनके, मेरी लगी को बुझाये ना,
पड़ी नदिया के किनारे मैं प्यासी, माई री,

पी की डगर में बैठे मैला हुआ री मेरा आंचरा,
मुखडा है फीका फीका, नैनों में सोहे नहीं काजरा
कोई जो देखे मैया, प्रीत का वासे कहूं माजरा
पी की डगर में बैठा मैला हुआ री मेरा आंचरा,
लट में पड़ी कैसी बिरहा की माटी, माई री

आँखों में चलते फिरते रोज़ मिले पिया बावरे
बैंया की छैंया आके मिलते नहीं कभी साँवरे
दुःख ये मिलन का लेकर , काह कारूँ , कहाँ जाउँ रे
आँखों में चलते फिरते , रोज़ मिले पिया बावरे ,
पाकर भी नहीं , उनको मैं पाती माई री ...
________________________________

हाँ
माई री, मैं कासे कहूँ पीर, अपने जिया की,
माई री,

Oh My Mother, To Whom I Share the Distress of my heart?

माई री : Oh Mother
मैं कासे : To Whom
कहूँ : Tell
पीर : पीड़ : Pain , Distress
अपने जिया : my heart
________________________________

ओस नयन की उनके,  मेरी लगी को बुझाये ना,
तन मन भीगो दे आके, ऐसी घटा कोई छाये ना,
मोहे बहा ले जाये, ऐसी लहर कोई आये ना,
पड़ी नदिया के किनारे मैं प्यासी, माई री,

ओस नयन की उनके,  मेरी लगी को बुझाये ना,
Moist eyes of beloved failed to
extinguish the fire within me ,

तन मन भीगो दे आके, ऐसी घटा कोई छाये ना,
No rain from overcast skyies drench me to extinguish the fire raging inside.

मोहे बहा ले जाये, ऐसी लहर कोई आये ना,
No wave come to swept me
to librate me from this misery

पड़ी नदिया के किनारे मैं प्यासी, माई री,
I am thirsty even on a river bank within abundance of water , Oh mother

ओस : moist , tear
नयन : eyes
घटा : dense black clouds in horizon
छाये : spread of black clouds
मोहे : to me
बहा : swept
ले जाये : take away
ऐसी : this kind
लहर : wave
नदिया : river
किनारे : bank of river
प्यासी : thirsty
माई : mother
माई री : oh my mother
_______________________________

पी की डगर में बैठे मैला हुआ री मेरा आंचरा,
मुखडा है फीका फीका, नैनों में सोहे नहीं काजरा
कोई जो देखे मैया, प्रीत का वासे कहूं माजरा
लट में पड़ी कैसी बिरहा की माटी, माई री

पी की डगर में बैठे मैला हुआ री मेरा आंचरा,
waiting on the passage of beloved anticipation of his return endlessly, spoiled my total soul ( metaphorical आंचरा :  आँचल : दुपट्टा : Head Covering : Self Respect )
Or
In endless anticipation of return of beloved lost all self dignity , respect , esteem , confidence .

मुखडा है फीका फीका, नैनों में सोहे नहीं काजरा
Despaired face lost all grace glare ,
eyes doesn't enjoy kohl
Or
Above said endless waiting spoiled the all glory grace of personality as in the deep heart , the innermost sad feeling deject all materialistic cosmetic enjoyment.

कोई जो देखे मैया, प्रीत का वासे कहूं माजरा
What to say to anybody concerned about my sad dull or heartless appearance due to sanctity or privacy of my love towards beloved.

लट में पड़ी कैसी बिरहा की माटी, माई री
Metaphorical : as every one take care of cleanness of hair but the despaired separation spoiled the hairs due to (metaphorical : dust) , dust of neglect , deject , despair , curse on oneself

पी : पिया : beloved
डगर : passage , return path
बैठे : sitted
मैला : filthy , dirty , need washing
री : addressing a female here her mother ( slang )
मेरा : my
आंचरा : vail , scarf , ( metaphorical : self dignity , pride , confidence )
मुखडा : face
फीका : faded ( lost grace , glory )
नैनों : eyes
सोहे : splendid , decoration , enjoyment
काजरा : काजल , black kohl , eyeliner
कोई जो देखे : anyone who see
मैया : माई : माँ : mother
प्रीत : love
वासे : sanctity , privacy
कहूं : to tell
माजरा : the story , narration , episode
लट : Curl in hair , hair’s coil
बिरहा : separation
माटी : dust , mud ,
माई री : oh my mother : addressing mother in despair
________________________________

आँखों में चलते फिरते रोज़ मिले पिया बावरे
बैंया की छैंया आके मिलते नहीं कभी साँवरे
दुःख ये मिलन का लेकर , काह कारूँ , कहाँ जाउँ रे
पाकर भी नहीं , उनको मैं पाती माई री ...

आँखों में चलते फिरते रोज़ मिले पिया बावरे
In half senses, eyes I could feel my beloved widely

बैंया की छैंया आके मिलते नहीं कभी साँवरे
But never come within my embracement oh my beloved ( here refered as Lord Krishna :  साँवरे : the ultimate mystic beloved )

दुःख ये मिलन का लेकर , काह कारूँ , कहाँ जाउँ रे
Pain of separation : to whom to tell ? : where to go ?

पाकर भी नहीं , उनको मैं पाती माई री ...
I can't touch even after feeling him
Oh my mother

आँखो : eyes
चलते फिरते : walking , moving
रोज़ : daily
मिले : meet , met
पिया : beloved
बावरे : addressing with Ardour of love
बैंया : arms
छैंया : shadow
बैंया की छैंया : embrace , physically touch
आके मिलते नहीं कभी : never come to meet
साँवरे :  साँवला : dark complextion :
reference to Lord Krishna :
Ultimate Beloved Lover in Indian folklore
दुःख : pain , suffering
मिलन : union
काह : what
कारूँ : to do
काह कारूँ : what to do
कहाँ : where
जाउँ : to go
कहाँ जाउँ रे : where to go
पाकर : feel
पाती : get
माई री : oh my mother
_______________________________
©®℗
Kapil Jain,
Kapilrishabh@gmail.com
January , 22   2017

Friday, January 6, 2017

Pygmalion & Galatea’ folk tale from Cyprus ’पीगमेलीऐन और गैलेटिया' साइप्रस की प्रसिद्ध प्रेम लोक कथा in Hindi By Kapil Jain







’Pygmalion & Galatea’
folk tale from Cyprus

’पीगमेलीऐन और गैलेटिया'
साइप्रस की प्रसिद्ध प्रेम लोक कथा
in Hindi By Kapil Jain
______________________________

शबाब आया, 
किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया,
मेरी दुनिया में, 
बंदे के ख़ुदा होने का वक़्त आया...
.... पंड़ित हरी चंद अख़्तर

'Pygmalion and Galatea' ,1886
Painting by Ernest Normand,
British, 1859 - 1923

______________________________

शबाब आया, 
किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया,
मेरी दुनिया में, 
बंदे के ख़ुदा होने का वक़्त आया...
.... पंड़ित हरी चंद अख़्तर

शबाब : youth , prime of life , ज़वानी
बुत : idols , a Metaphor of beloved or beauty ( though literary Statue )
फ़िदा : sacrifice , devotion , devoted
बंदे : a person
ख़ुदा : God
______________________________

The Story of ’Pygmalion & Galatea’
in Hindi By Kapil Jain

’पीगमेलीऐन और गैलेटिया'
साइप्रस की प्रसिद्ध प्रेम लोक कथा

पीगमेलीऐन नाम से एक शिल्पकार , साइप्रस देश में अनन्त काल मे बहुत प्रसिद्ध हुआ था , पीगमेलीऐन द्वारा की गयी शिल्पकारी अदभुद थी , उसकी छेनी हथौड़ी जब किसी पत्थर की शिला पर अपना रँग बिखेरती थी , तो परिणाम स्वरुप एक बरबस सजीव प्रतिमा का अनावरण होता ।

पीगमेलीऐन ख़ुद शक़्ल सूरत मे कोई खास नहीं था , असभ्यता की माफ़ी पर सही शब्दों मे कुरूप ही कहा जायेगा , एक तरफ गज़ब शिल्पकारी और दूसरी और कुरूपता, न जाने क्यों ,पीगमेलीऐन की कोई भी सुसंस्कृत खूबसूरत लड़की से मित्रता नहीं हो पायीं । कोई असभ्य , कोई मतलबी , कोई व्यवहार मे रूखी , जो भी औरत उसके जीवन मे आयी सिर्फ धोखा देकर ही गयी ।
कुल मिला कर असर ये हुआ की उसका , सम्पूर्ण औरत जाति से ही मोहः भंग हो गया । उसने प्रण किया की वह कभी शादी ही नहीं करेगा ।

उदेह्लित मन लिये , शांति की तलाश मे फिर रुख किया अपने कला को समर्पित संसार का जहाँ उसने हाथी के एक दांत पर अपनी छेनी हथौड़ी से एक लड़की की आकृति उकेरी , उस आदर्श लड़की की छवि जो उसके मन मे थी ।

आदर्श लड़की की छवि स्वरूप , अपनी कलाकृति संपूर्ण होते ही , उसे एहसास हुआ , की इस कलाकृति की बराबरी कोई और लड़की नही कर सकती , उसे सहसा विश्वास ही नही हो रहा था कि कोई लड़की इतनी भी ख़ूबसूरत हो सकती है । मुड़ मुड़ उसको देखता । बार बार निहारता । ना जाने क्यूँ , फिऱ वही दिल की रगों का टूटना , क्यूँ यह हकीकत नही ? क्यूँ यह है सिर्फ एक बुत ।

एक बात तय थी की पीगमेलीऐन को अपनी इस हाथी दांत की कृति से प्रेम हो चला था , अथाह प्रेम , प्रेम की पराकाष्ठा , इसी प्रेम भावना से सरोबोर उसने उसका नाम रखा Galatea ( गैलेटिया ) , जिसका शाब्दिक अर्थः ही है सफ़ेद जैसे दूध ।

उसने दीवानेपन की सर्वक्षेष्ठ सरहदों को छूते हुए , अपनी हाथी दांत की प्रेयसी गैलेटिया को कीमती वस्त्र और आभूषणों से शुशोभित किया ।

संयोग से साल के लगभग उसी समय सारे साइप्रस में मनाये जाने वाला , वार्षिक उत्सव जिसमे प्रेम की देवी 'Aphrodite' ( एफ्रोडाइट ) की पूजा की जाती है और देवी से मनोकामना स्वरूप अपने दिल की मन्नत मांगी जाती है , का दिन आया ।

पीगमेलीऐन ने प्रेम की देवी 'एफ्रोडाइट' से इस उत्सव मे अपने दिल की तमन्ना प्रार्थना स्वरुप रखी ,

”अगर देवी सब चीजें दे सकती है , तो मुझे मेरी पत्नी मिले"

वह प्रार्थना में कहना तो चाह रहा था ’गैलेटिया’,
पर गलती से कह गया ”हाथी दांत जैसी लड़की"

प्रेम की देवी 'एफ्रोडाइट' तो आखिर देवी थी , मनोकामना पूर्ति हेतु , पवित्र अग्नि की ज्वाला तीन बार पीगमेलीऐन के आशीर्वाद में प्रवज्लित की ।

देवी के आशीर्वाद से अभिभूत पीगमेलीऐन ने घर आकर गैलेटिया का हाथ प्रेमपूर्वक चूमा , इस चुम्बन के नर्म स्पर्श से गैलेटिया जीवंत हो उठी । पीगमेलीऐन ऐसे चौका जैसे ततैये ने डंक मारा हो । वह तो ख़ुशी से पागल हो उठा ।

दोनो ने शादी कर ली और ख़ुशी ख़ुशी अपना जीवन व्यतीत करने लगे । फिर उनके बेटे Paphos ( पफोर्स ) का जन्म हुआ , जिसके नाम पर आज भी साइप्रस के एक शहर Paphos है ।

समाप्त
--------------------------------------
Preface
Dear Reader ,

Cyprus folklore ’Pygmalion & Galati’ has inspired artist from all walks of like ,
Painters , Writers , Poets , Actors , etc. ,
Same like Indian folklore Laila Majnu , Sohni Mahiwal etc.

This is my second post regarding this Legend,

First with Sahir Ludhiyanvi’s couplet i.e.
किसी पत्थर की मूर्त से मोहब्बत का इरादा है
On Jean Leon Crome Painting

Now with this second attempt with
Pandit Hari Chand Akhtar's
शबाब आया, किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया,
On Ernest Normand , both paintings with the Same title ’Pygmalion & Galati’

As could not find the same in Hindi font ,
Hence trying to put this beautiful legend in Hindi on Internet .
--------------------------------------
©®℗
Kapil Jain,
Kapilrishabh@gmail.com
December 23, 2016
--------------------------------------