Friday, December 18, 2015

”Ku Ba Ku Phail Gayi Baat Shanasai ki"

Kapil Jain's :
Translation & Understanding of Parveen Shakir's
”Ku Ba Ku Phail Gayi Baat Shanasai ki"

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की

कैसे कह दूँ के मुझे छोड़ दिया है उसने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की

तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे
तुझ पे गुज़रे ना क़यामत शबे-तन्हाई की

वो कहीं भी गया लौटा तो मेरे पास आया
बस यही बात है अच्छी मेरे हरजाई की

उसने जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा
रूह तक आ गई तासीर मसीहाई की

अब भी बरसातों की रातों में बदन टूटता है
जाग उठती है अजब ख्वाईशें अँगड़ाई की
     
                            .......परवीन शाक़िर

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कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की

कू-ब-कू : सारी दिशाओं में
शनासाई : परिचय होना
पज़ीराई : स्वीकृति

भावार्थः
जैसे एक परिचय की बात , गली मौहल्ले में फैल जाना,
जिससे बहुत बदनामी का अंदेशा हो ,
इसके विपरीत , इस बात का ऐसे स्वागत हो ,
जैसे एक ख़ुश्बू ख़ुशी देती है

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कैसे कह दूँ के, मुझे छोड़ दिया है उसने
बात तो सच है , मगर बात है रुस्वाई की

रुस्वाई : बदनामी अपमान अनादर

भावार्थः
सच तो है की उसने छोड़ दिया उसको ,
पर बदनामी के डर से यह बात बताने की नहीं है

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तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे
तुझ पे गुज़रे ना क़यामत शबे-तन्हाई की

तेरा पहलू : तेरा सोचना , तेरा हाल , your version
आबाद : बसा हुआ , inhabited
क़यामत : day of final judgment by god
शबे-तन्हाई : night of loneliness

भावार्थः
यह मेरी दुआ है की
तेरी सोच तेरा हाल , तेरे दिल की तरह ही आबाद रहे ,
और उसको कभी भी अकेलेपन से बोझिल रात ,
जहाँ एक एक पल मौत के आख़री लम्हें की तरह तकलीफ़ देय हो , कभी न गुज़ारनी पड़े ,
जैसी मैने गुजारी है

या

हम पे जो भी गुजरे
तुम हर तरह से ठीक रहो

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वो कहीं भी गया लौटा तो मेरे पास आया
बस यही बात है अच्छी मेरे हरजाई की

हरजाई : आवारा , Vagabond

भावार्थः
वो बेवफ़ा , मुझे छोड़ कर , दुनिया मे कहीं गया
पर जब आया तो मेरे ही पास आया ,
बस यही बात मुझे अच्छी लगती है

या

आपकी मोहब्बत इतनी ज्यादा अंधी है की वो कुछ भी करे , आप फिर भी उसमे सिर्फ अच्छाई ही तलाशते रहते है।

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उसने जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा
रूह तक आ गई तासीर मसीहाई की

जलती : feverish or burning
पेशानी : माथा : forehead
रूह : soul : आत्मा
तासीर : प्रभाव : influence
मसीहाई : मसीहा : healer : great touch

भावार्थः
"उसने" जिसका दिल को इंतज़ार था , जब मेरे जलते हुए माथे पर अपना हाथ रखा ( उदाहरणतः बुख़ार से तपते हुए माथे पर ) ,
आत्मा ने उस स्पर्श मे मसीहा वाली आत्मीयता का अहसास किया ।

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अब भी बरसातों की रातों में बदन टूटता है
जाग उठती है अजब ख्वाईशें अँगड़ाई की
    
भावार्थः help yourself

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Original Source :
कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
https://rekhta.org/ghazals/kuu-ba-kuu-phail-gaii-baat-shanaasaaii-kii-parveen-shakir-ghazals?lang=Hi

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https://youtu.be/HEDe52fExq8

Tuesday, December 15, 2015

Kapil's : Understanding of Electricity Billing Computation 2015-2016 for Domestic like Sector-44.


Date: December 15, 2015
Respected Residents Sector-44,
Subject: Understanding of Electricity Billing Computation 2015-2016 
for Domestic like Sector-44.
Jai Hind,
Below, Two Screen Shots of Relevant Portions of Power Tariff Applicable for Sector-44, Noida as power supplier is PVVNL. ,

A: Example:
Let’s assume our December 2015 meter reading is
KWH: 2967
KVAH: 3037
Sanctioned Load: 14 KW

B: “Electricity Charges” in Billing Details Colum
0-150 KWH/month @4.40 = Rs.660.00
151-300 KWH/month @4.95 = Rs.742.50
301-500 KWH/month @5.60 = Rs. 1120.00
501-2967 KWH/month @6.20 = Rs. 15295.40
Total For 2967 KWH/month is = Rs. 17817.90

C: “Fixed/Demand Charges” in Billing Details Colum
Sectioned Load in this case = 14KW x (Rs. 90.00 /KW/Month) = Rs. 1260.00
Note: If Electricity Drawn is more that section load i.e. 15.6KW in any month then 15.6 x 90.00 = Rs. 1404.00

D:      B+C = D  
Means Rs. 17817.90 + Rs. 1260.00 = Rs. 19077.90

E: “Electricity Duty” in Billing Details.
This is 5% of D   , Which is Rs. 19077.90 x5/100 = Rs. 953.89

F: Regulatory Surcharge 1 
This is 2.84% of D, Which is Rs. 19077.90 X 2.84/100 = Rs. 541.81

G:  Regulator Surcharge 2 (Newly added burden on Consumers in 2015-2016)
This is 4.28% of D, Which is Rs. 19077.90 X 4.28/100 = Rs. 816.53

H:  “Current Payable” = B+C+E+F+G
Rs. 17817.90 + Rs. 1260.00 + Rs. 953.89 + Rs. 541.84 + Rs. 816.53 = Rs. 21390.16

Please note that Sector44 is Experiencing  the difference in Bill Amount Given by Meter Reader & Internet online bill , reason being that meter  reader’s machine software is not updated With Newly introduced Regulatory Charges i.e. F & G .

Thanks
Kapil Jain, C-145, Sector-44, Noida

PS:
Please Note , Our Billing Unit is KWH , Not KVAH in any case , because our consumption is purely domestic purpose , not commercial in any case ,  Very Important to note that Meter Reader of Department is Taking both Readings, Henceforth The earlier misconception regarding the effect of  Capacitor on / off on Billed Amount  is not applicable in our case. Having Said that It is always advisable to Maintain Power Factor in Between 0.85 to 1.00 in NATIONAL INTERST to make power supply clean & pure as well as healthy power grid, as newly installed meter is recording KWH as well as KVAH, which required Capacitor On in Summers with Air Conditioners Load & Capacitors off When Air Conditioners are not in use.












Sunday, November 15, 2015

Nov 15, 2015

ऐ वक़्त मेरे हाथों मे इक और लकीर खींच ,
वो मेरी ज़ीस्त मे दबे पाँव आया है....
                                .......भारती चोपड़ा

ज़ीस्त : ज़िन्दगी : Life
                      
"Future of a promising sailor"
Painting by Francesco Bergamini,
Italian, 1815 - 1883

Sunday, November 1, 2015

Ahista chal zindagi by Gulzar


आहिस्ता चल ज़िन्दगी
कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है

कुछ दर्द मिटाना बाकी है
कुछ फर्ज़ निभाना बाकी है

रफ़्तार मे तेरे चलने से कुछ रूठ गए
कुछ छुट गए

रूठो को मनाना बाकी है
रोतो को हँसाना बाकी है

कुछ हसरते अभी अधूरी है
कुछ काम अभी और ज़रूरी है

ख्वाईशें जो घुट गयी है दिल मे
उनको दफनाना बाकी है

कुछ रिश्ते बन कर टूट गए
कुछ जुड़ते जुड़ते छुट गए

उन टूटे छूटे रिश्तों के ज़ख्मो को मिटाना बाकी है

तू आगे चल , मै आता हूँ
क्या छोड़ तुझे ज़ी पाऊँगा ?

इन साँसों पे हक़ है जिनका
उनको समझाना बाकी है

आहिस्ता चल ज़िन्दगी
कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है

                   .......गुलज़ार

Sunday, October 18, 2015

Ay mohbat tere anjaam pe rona aaya

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यू आज तेरे नाम पे रोना आया

यूँ तो हर शाम उम्मीदों मे गुज़र जाती है
आज कुछ बात है जो शाम से रोना आया

कभी तक़दीर का मातम , कभी दुनियां का गिला
मंज़िलें इश्क़ में हर ग़ाम पे रोना आया

मुझ पर ही ख़त्म हुआ सिलसिला-ऐ-नौउहागिरि
इस क़दर गर्दिश-ऐ-अय्याम पे रोना आया

जब हुआ , ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का 'शक़ील'
मुझकों अपने दिल-ऐ-नाक़ाम पे रोना आया

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यू आज तेरे नाम पे रोना आया

                .................   शक़ील बदायूँनी

ग़ाम : Step

नौउहागिरि : Dirge
A dirge is a somber song or lament expressing mourning or grief, such as would be appropriate for performance at a funeral.

गर्दिश : misfortune
अय्याम : duration

https://youtu.be/ik75GgM7VV4

Wednesday, August 26, 2015

The Transit of Venus




नन्ही जिज्ञासु आँखों मे ही पायी
चाँद सितारों ने अपनी परछाई
इतनी चमक तो ख़ुद चाँद में भी नहीं थी
जितनी इन आँखों ने दर्शायी
यही है बचपन की मासूम सच्ची आँखों की कशिश
निश्छल चंचल शब्दों ने यही अपनी परिभाषा है पायी
........कपिल

"The Transit of Venus" 1883
Painting by John George Brown,
American, 1831 - 1913

Friday, August 14, 2015

Millen Barjtya photo

लकीर टपू
त्रिकोण टपू
चैकोर टपू

इक बार टपू
सौ बार टपू

पार करूँगा
जीवन की हर सरहद
यूँही मस्त मस्त कदमो से
पाउँगा सर्वशेष्ट मुकाम

परवाह नहीं चाहे कितनी ही लम्बी हो यह डगर ,
कामना है सिर्फ यही , बने रहने हमेशा मेरे साथ यु ही

.............. मिलन बड़जात्या

Monday, August 10, 2015

Vedika Facebook Post Kapil's Kavita





छुक छुक करती आगे बढ़ती
पर्वत जंगल नदी पहाड़
सबको पार करती
समुंदर तट पर लेकर जाती

छुक छुक करती आगे बढ़ती
मे मम्मी नानी को साथ लिए
शनिवार को घूमने निकली
कितने मजे का दिन है यह

छुक छुक करती आगे बढ़ती
सपनो का संसार रचाती
इक दिन चाँद सूरज तक जाउंगी
सात समुन्दर पार हो आऊँगी
महाद्वीप प्रायद्वीप खाड़ी दर्रे
उत्तरी ध्रुवः दक्षिणी ध्रुवः
एवरेस्ट तक हो आउंगी
अपने सारे दोस्त भी लेकर जाउंगी

छुक छुक करती आगे बढ़ती

Tuesday, August 4, 2015

Ay mohbat tere anjaam

ऐ मोहब्बत, तेरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूँ, आज तेरे नाम पे रोना आया

यूं तो हर शाम उम्मीदों में गुज़र जाती थी
आज कुछ बात है जो शाम से रोना आया

कभी तक़दीर का मातम , कभी दुनिया का गिला
मंज़िले इश्क़ में, हर ग़ाम पे रोना आया

मुजहे पर ही ख़तम हुआ सिलसिला-ऐ-नौउहागिरि
इस क़दर गर्दिश-ऐ-अय्याम पे रोना आया

जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का "शक़ील"
मुझको अपने दिल-ऐ-नाकाम पे रोना आया

               ............................. शक़ील बदायूँनी

ग़ाम : step, footstep, pace of a horse
नौउहागिरि : mourning
अय्याम : fortune

Tuesday, June 16, 2015

Kapil Jain : Story : Lost Priorities



Kapil Jain : Story : Lost Priorities

बात जो कहने जा रहा हूँ , अगर बुरी लगे तो माफ़ी देना , पर कह रहा हूँ पूरे होशों हवास मे |

इसे एक चुभती हुई बात कहिये या अपनी गलती या पता नहीं क्या है यह , हुआ यूं की करीब दस साल पहले , हम करोल बाग़ दिल्ली से नोएडा शिफ्ट हुऐ थे |
अभी घर मे काफी फर्नीचर इत्यादि बनना बाकि था , करीब चार पांच दिन ही हुऐ थे , पूरे घर मे कोई भी कमरा पूरी तरह व्यवस्थित नहीं था , कुछ सामान पुराने घर से नहीं आया था , क्योंकि अभी तक ऑफिस पुराने घर के पास था अतः प्रतिदिन थोडा थोडा सामान आ जाता था और अपनी नयी जगह सेट हो जाता था |

एक शाम , सामान मे कुछ पुराने दस्तावेज़ की फ़ाइले मेरी माँ की अलमारी से आये , जो कुछ बहुत खानदानी विरासत लिए हुए लगते थे अतः मैने अपनी माँ के कमरे में उन्हें बताते हुऐ कहा , आप इन्हें देख लेना , माँ लेटी हुई आराम कर रही थी , बोली की बहुत थक गयी हूँ कल देखूँगी |

अगली रात देर हुई जब मे घर वापस आया तो बहुत ही थक गया था , माँ बहुत ही देर से मेरा इंतज़ार कर रही थी , उन्होंने मुझे एक फ़ोटो देते हुए कहा , की यह आपकेे पड़बाबा जी की एक मात्र फ़ोटो है , इसे बहुत संभाल के रखना , मैने पहली बार अपने पड़बाबा जी की फ़ोटो देखी थी , मुझे बहुत ही ख़ुशी हुई , अभी तक मेरा अपना कमरा और अलमारियां भी सेट नहीं हुई थी , मैने बहुत ही ध्यान से फ़ोटो अपनी एक किताब के अंदर रख दी |

कुछ हुआ यूं कि अगले दिन ही मुझे कही दूसरे शहर एक हफ्ते के लिये जाना पड़ा | जब वापस आया तो पाया , घर काफी कुछ व्यवस्थित था , बहुत ही अच्छा लग रहा था | क़रीब दस पंद्रह दिन हुए , नाश्ते पर माँ ने मुझसे कहा की पड़बाबा जी की फ़ोटो को फ्रेम करवा देना , सुनते ही मेरा माथा ठनक गया , मेरी सारी किताबे उस जगह से हट कर स्टडी की अलमारीयो मे सेट हो चुकी थी , मुझे यह भी याद नहीं था की मैने किस किताब मे फ़ोटो रखी थी | माँ ने सिर्फ़ मेरी शक़्ल से ही सारी बात समझ ली , कुछ नहीं कहा |
मैं ऑफिस चला गया , ऑफिस मे भी आधा दिमाग़ फ़ोटो में ही रहा , शाम देर से ही घर वापस पंहुचा , डिनर करते ही , एक एक करते छः दर्ज़न किताबो का पन्ना पन्ना छान मारा आधी रात हो गयी , फ़ोटो का कोई अता पता नहीं | सुबह नाश्ते पर माँ ने सिर्फ़ शक्ल देखी कुछ नहीं बोली | अगले दिन संडे था , दुनिया जहान का काम छोड़ कर मैने सारी किताबे फिर पलट दी , भगवान जाने फ़ोटो कहा गयी | मै बहुत परेशान हो गया | माँ सारी बात समझते हुए भी चुप थी | महीने दो महीने निकल गए | मै भी अब यह बात लगभग भूल गया | फिर एक दिन ना जाने कैसे घर की फर्नीचर की बात करते करते फ़ोटो का ज़िक्र आ गया | मैने माँ से कहाँ की माँ मुझसे बहुत गलती हो गयी पड़बाबा जी की फ़ोटो मुझसे गुम हो गयी , बोली की मुझे पता था की वोह फ़ोटो गुम गयी हैं , जो हुआ शायद यही नियति थी , आख़िर तीन पीढ़ी का संभाल रखना वैसे भी बहुत मुश्क़िल है और वैसे भी यह सब प्राथमिकता की बात है |

माँ का "प्राथमिकता" वाला आख़री वाक्य कही दिल को लग गयी, इस वाकिय के करीब आठ साल बाद माँ का देहांत हो गया और अब दो साल और गुजरे की अचानक फ़ोटो मिली किसी किताब से....

वैसे राजमहलों के अलावा कही देखी है तीन पीढी की फ़ोटो ? सही है , बात तो प्राथमिकता की है.....

Story : Lost Priorities
By Kapil Jain,
C - 145, Sector - 44, Noida
+919810076501
Kapilrishabh@gmail.com
Noida , Jun 15, 2015

Thursday, May 28, 2015

Kapil Jain's Story : "झूठी गुठली"

Kapil Jain's Story  :   "झूठी गुठली"

कल ही फैक्ट्री का हमारा पुराना चपरासी मदन गांव से छुटटी बीता कर वापस आया । दिन के खाने के समय में मैने कहा , मदन भाई हमारा टिफ़िन गरम कर दो , वो खाना गरम करके हमेशा की तरह थाली में परोस कर लाया।

मैने देखा थाली मे ताज़ी इमली भी सजी थी , मैने नज़र उठा कर जैसे मदन को देखा , वो बोला भाई साहिब , हमारे गाँव की इमली बहुत मीठी होती है , इत्तफ़ाक़ से अबकी बार ताज़ी ही उतरी थी सो हम आपके लिए भी ले आये ।

इमली बहुत ही बढ़िया थी । खाने के बाद, झुठी थाली मे , करीब दस - बारह गुठली थी । मैने राेज की तरह, मदन को बुला कर टेबल को साफ करने को  कहा ।पता नहीं क्यों ? मैने सवालिया अंदाज़ मे उससे पूछा , कि इन गुठलियों को अगर ज़मींन में बो दें तो क्या ईमली का पेड़ हो जायेगा।

वो बोला की हो तो जायेगी पर हम सच्ची इमली से गुठली निकाला कर बोएगे , यह सब गुठली झुठी हो गयी है ।

मै लाज़वाब हो गया ।

जाकी रही भावना जैसी.........

Kapil Jain
+91-98100-76501
Kapilrishabh@gmail.com

27th May 2015,  Noida


Monday, March 23, 2015

Kapil Jain's Story : Motor cycle hoarding



यादें लड़क़पन की कपिल जैन के साथ :
Motor cycle hoarding
संडे , मार्च 22 , 2015 नॉएडा , इंडिया


हम सब दोस्त हर शाम को इकहटे होकर खेलते थे
और कभी गप्पे लगते थे बहुत ही मजे आते थे ,
क्या दिन थे वो

एक दिन इतवार की बात है उसी तरह शाम को गप्पे लग रही थी की मैने बताया की यारों कमाल को गया

पंचकुईया रोड के गोल चक्कर पर शमशान के सामने एक बहुत बडी होर्डिंग लगी है यामाहा मोटरसाइकिल के नई मॉडल की एडवरटाइजिंग के लिए,
क्या दिमाग़ लगाया है की मोटरसाइकिल की फ़ोटो की बज़ाय , असली मोटरसाइकिल ही होर्डिंग पर टांग दी है

मेरी ज़िन्दगी की विडंबना सदा से ही रही है की मेरी छवि बहुत गप्पी वाली रही है , शायद वक़्त से आगे ,
पता नहीं क्यों , बात सिद्ध हमेशा करनी पड़ती थी.
यही बात आगे मेरी ताक़त बनी

वही हुआ उस दिन , सारे दोस्तों ने वो मज़ाक बनाया की मूड ही बिगड़ गया , पर उससे क्या होना था ,
मज़ाक मखोल में बदल गया , अब माहौल बर्दाश्त के बाहर था , मैने कहा सबको , मानना है हो मानो , नहीं तो सब खुद ही चलकर की देख लो चार पांच किलोमीटर चलने की ही तो बात है , वैसे भी अभी शाम के पांच ही तो बाजे है , सात बजे तक भी घर वापस आ गए तो मम्मी से डांट नहीं पड़ेगी ।

मेरी अपनी बात पर यकीन या मेरे दोस्तों को इस बात की अजीबोग़रीब वास्तिविकता पर संदेह या दिलचस्पी , पता नहीं क्या , कुछ तो था की सब चलने को तुरंत खड़े हो गए ।

छटी सातवी मे पढ़ते रहे होंगे सब , कभी पहले अपने मौहल्ले से बाहर बिना किसी बड़े के गए नहीं थे , यह बात उठी तो किसी ने कहा की चलते है , हम करीब चौदह पंद्रह दोस्त होंगे ।

पंचकुईया रोड का गोल चक्कर , आज भी दिल्ली शहर का लगभग सेंटर पॉइंट है , गाये बगाहे शहरियों को पार करना ही पड़ता है , उस तरफ चलना शुरू हुए ।

रास्ते भर के आपने हालात के बारे में सोचते आज पैंतीस साल बाद भी बहुत हँसी आती है , की मेरे सबसे प्यारे दोस्तों ने मेरा मज़ाक बना बना कर मेरी हालत कुछ ऐसी कर दी की मेरा आँसु बस अब टपका या कहाँ अटका पता नही।

तीस चालीस मिनट लगे होंगे पहुँचने में ,
होर्डिंग दिखा , सुर्ख़ लाल रंग की चमकदार मोटरसाइकिल , उस पर पड़ती रौशनी जो खास उसी के लिऐ लगाई गयी थी , दिल की धड़कन को संगीतबद्ध किये हुए थी । उस समय तक हम सब सिर्फ साइकिल ही चलते थे , मोटरसाइकिल चलाने की उम्र अभी आयी नहीं थी ।

सबने देखा , आँखों में विस्मित , विश्वासमयता , चमक क्या क्या नहीं था , सभी कुछ था ।

वापसी का सफ़र कितना ख़ामोश था
मेरे यार ज़िंदाबाद .
आज सभी संसार भर नाप चुके है
सुर्ख़ लाल मोटरसाइकिल पर अपनी दिलरुबा को साथ लेकर चाँद का सफ़र अभी बाक़ी है ......


Kapil Jain
Kapilrishabh@gmail.com

Sunday, March 15, 2015

Ibn e mariyam hua kare koi


Kapil Jain Translation of 

Mirza Ghalib's Ghazal

Ibn e mariyam hua kare koi



इब्न-ऐ-मरियम हुआ करे कोई,
मेरे दुःख की दवा करे कोई..

शरीया-ओ-आईन पर मदार सही,
ऐसे क़ातिल का क्या करे कोई..

चले जैसे कड़ी कमान का तीर ,
दिल मे ऐसे जा करे कोई...

बात पर वहां ज़बां कटती है,
वो कहे और सुना करे कोई...

बक़ रहा हूँ ज़ुनून मे क्या क्या कुछ,
कुछ ना समझें  ख़ुदा करे कोई..

ना सुनो ग़र बुरा कहें कोई ,
न कहो ग़र बुरा करे कोई..

ऱोक लो गर ग़लत चले कोई ,
बख़्श दो ग़र खता करे कोई ..

कौन है जो नहीं है हाज़तमंद ,
किस की हाज़त-रवा करें कोई..

क्या किया ख़िज़्र ने सिकंदर से,
अब किसे रहनुमा करे कोई...

जब तवकों ही उठ गयी "ग़ालिब",
क्यों किसी का ग़िला करें कोई..

The end....
_______________________
इब्न-ऐ-मरियम हुआ करे कोई,
मेरे दुःख की दवा करे कोई..
इब्न : son
-ऐ- : conjunction
मरियम : Virgin Mary
इब्न-ऐ-मरियम : Jesus Christ

I Know about healing power of  Son of Virgin Mary ( Jesus Christ), 
let me be blessed to find the remedies for my sufferings.

___________________________

शरीया-ओ-आईन पर मदार सही,
ऐसे क़ातिल का क्या करे कोई..
शरीया : Islamic Divine code
-ओ- : conjunction
आईन : constitution
शरीया-ओ-आईन : Islamic law's constitution
मदार : Perimeter

This is the master stroke of Ghalib in which 
he is making an satire on hardliners, 
who they interpret the religious belief for their vested interest.
How to deal with the "Killer"? ,
who acts within the defined
perimeter of divine laws interpreted by them .
____________________________
चले जैसे कड़ी कमान का तीर ,
दिल मे ऐसे जा करे कोई...
कड़ी : stiff
कमान : bow
तीर : arrow, dart
Your dealing method are so rough,
Like a arrow striked from a stiff bow,
Pierced directly in my heart.,
So heart breaking,
No way to enter someone's heart.
_________________________
बात पर वहां ज़बां कटती है,
वो कहे और सुना करे कोई...
My opinion was interrupted always,
Only their opinions are allowed & appreciated there.
_________________________
बक़ रहा हूँ ज़ुनून मे क्या क्या कुछ,
कुछ ना समझें  , ख़ुदा करे कोई..
Speaking nonsense in obsession  ,
God forbid : no body understand nothing.
__________________________
ना सुनो ग़र बुरा कहें कोई ,
न कहो ग़र बुरा करे कोई..
Don't listen if someone says nonsense, ignore
Don't say if someone do bad or ugly. Ignore
__________________________
ऱोक लो गर ग़लत चले कोई ,
बख़्श दो ग़र खता करे कोई ..
Stop if someone steps wrong,
Forgive if someone do mistake
_________________________
कौन है जो नहीं है हाज़तमंद ,
किस की हाज़त-रवा करें कोई..
हाज़तमंद : needy
In this world, who is not needy?
Means everyone is needy,
Is anybody available to satisfy everybody's need.
_________________________
क्या किया ख़िज़्र ने सिकंदर से,
अब किसे रहनुमा करे कोई...
ख़िज़्र : Khwaja Khizr   "The Green Man" : is reputedly the only soul who has gained life immortal from tasting of the Fountain of Life.
सिकंदर : Alexander the great
रहनुमा : to guide someone
The highest benchmark of guidance is the accurate way in which "Khizr" guided "Alexander" to persuade life,
Now no accurate guide, nor disciple,
Therefore whom to guide & by whom?
_________________________
जब तवकों ही उठ गयी "ग़ालिब",
क्यों किसी का ग़िला करें कोई..
तवकों : expectations
ग़िला : Complaints
When no expectations remains,
What is the point to be a complainant?
_____________________________
The End...
Kapil Jain
+91-98100-76501
Kapilrishabh@gmail.com
Kapil Jain's : Translation of
Mirza Ghalib's Ghazal
"Ibn e mariyam hua kare koi"
Begum Akhtar -
ibn-e-mariyam hua kare koi:
http://youtu.be/hRzd8JxhRTo

Saturday, February 28, 2015

Kapil’s Story: The Great "Ferragamo"



Kapil’s Story:  The Great "Ferragamo"


One day as I came back extremely tired back home, 
after finishing dinner, I start surfing TV channel, got a movie midway,
therefore saw an incomplete movie in which
a young boy "Ferragamo" struggled a lot to make a mark in this grilling world with his unique artistry & designs.
The end of the movie was very moving in which he aged to become an extremely successful designer in the fashion world with huge fame, wealth was under his feet, a line of celebrities were amazed with the use of his creations, but was Very lonely inside, as his "creations" be it a dress or belt or purse or bag or Spectacle Frames or pen, always complaint back to him that they (the creations) never gets the deserving Connoisseur of the creations.
He ask one of his creation "The Pen" about the grievance, The Pen replied

Dear Ferragamo, you always design each of your creations including me with lot of pain & with the best raw materials procured from far flung regions, but people hardly take the real use of the creations,  instead just use to see the enviousness  in other eyes,

In my case people’s puts me in front pocket of their coat just to show "The Flower" of my pen-top in the parties but hardly use me for writing anything, they use other not so expensive pen to write beautiful love letters. & also they just talk about your name in appreciation, nobody talks about my writing capabilities.
The Great "Ferragamo" replied with great love & passion to his creation "The Pen"
oh my dear Pen, you need to be optimistic, you will get a true writer one day,  who will give you true credit for writing pleasure, when the Connoisseur gets the love feeling in his beloved eyes after reading the love letters written with your nib & ink, 
The day is not far away, please have  patience, as I have  just got back a complement from one of your sibling "The hand bag" specially made for a woman, got a Connoisseur in India named "Priya".
"The hand bag" just yesterday specially phoned me just to tell me about the possessor Ms "Priya", who is so beautiful, graceful that whenever she touches the bag with her soft hands, each time a new sheen, a new shine, emerges all over. I am pretty sure that the softness of her fragranced hands are exclusive to Mr. Pawan, Yatharth & me only. 
Further stated, 
Oh my creator "Ferragamo" when Priya smiles, flowers blooms. 
When she angry the summer starts, 
When she happy the rains starts, 
She has friendship with sparrows, butterflies the Ultimate celebrities of divine nature. 
I am blessed, 
I am blessed, 
I am blessed 
Dear "Ferragamo" I don't have further desire for rebirth as my I found my final & ultimate admirer as Ms. "Priya".
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हज़ारो साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है
बड़ी मुश्क़िल से होता है चमन मे दीदावर पैदा...
                                           ......
इक़बाल
हज़ारो : thousands
साल : year
नर्गिस : a beautiful White flower
बेनूरी : without a true admirer
बड़ी मुश्क़िल से होता है : with great difficulty 
चमन : ( sort of garden) 
दीदावर : Connoisseur, admirer 


Tuesday, February 24, 2015

Parveen Shakir's "Chalne ka Hausla nahi" : Translated by Kapil Jain with the help of Rekhta link




Parveen Shakir's "Chalne ka Hausla nahi" : Translated by Kapil Jain with the help of Rekhta link

चलने का हौसला नहीं , रुकना मुहाल कर दिया
इश्क़ के इस सफ़र ने तो , मुझको निढ़ाल कर दिया

ऐ मेरी गुल-ज़मीन तुझे , चाह थी इक किताब की
ऐहले-क़िताब ने मगर क्या तेरा हाल कर दिया

मिलते हुऐ दिलो के बीच , और था फ़ैसला कोई
उसने मगर बिछड़ते वक़्त और सवाल कर दिया

अब के हवा के साथ है दामन-ऐ-यार मुन्तज़िर
बनो-ऐ-शब् के हाथ मे रखना संभाल कर दिया

मुमकिना फ़ैसलों मे एक , हिज़्र का फ़ैसला भी था
हमने तो एक बात की, उसने कमाल कर दिया

मेरे लबों पे मोहर थी पर मेरे शीशा-रु ने तो
शहर के शहर को मेरा वाकिफ़-ऐ-हाल कर दिया

चेहरा-ओ-नाम एक साथ आज ना याद आ सके
वक़्त ने किस शबीह को ख्वाबो-ओ-ख्याल कर दिया

मुद्दतों बाद उसने आज मुझसे कोई गिला किया
मनसब-ऐ-दिलबरी पे क्या मुझको बहाल कर दिया


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चलने का हौसला नहीं , रुकना मुहाल कर दिया
इश्क़ के इस सफ़र ने तो , मुझको निढ़ाल कर दिया

ऐ मेरी गुल-ज़मीन तुझे , चाह थी इक किताब की
ऐहले-क़िताब ने मगर क्या तेरा हाल कर दिया

1. गुल-ज़मीन : flowers spreaded land, fertile land , ( here ref. to creativity) ,
2. चाह थी इक किताब ( something new)
3. ऐहले-क़िताब (People following a book)(all hardcore religion people who interpreted in waisted interst)

मिलते हुऐ दिलो के बीच , और था फ़ैसला कोई
उसने मगर बिछड़ते वक़्त और सवाल कर दिया

अब के हवा के साथ है दामन-ऐ-यार मुन्तज़िर
बनो-ऐ-शब् के हाथ मे रखना संभाल कर दिया

4. दामन-ऐ-यार : Hem of Beloved
5. मुन्तज़िर : expectant, one who waits
6. बनो-ऐ-शब् : Shoulder of Night

मुमकिन-ओ-फ़ैसलों मे एक , हिज़्र का फ़ैसला भी था
हमने तो एक बात की, उसने कमाल कर दिया

7. हिज़्र : Separation
(a simple desire for new creativity , Resisted by fundamental value leads to the ultimate Separation)

मेरे लबों पे मोहर थी पर मेरे शीशा-रु ने तो
शहर के शहर को मेरा वाकिफ़-ऐ-हाल कर दिया

8. शीशा-रु : like glass
9. वाकिफ़-ऐ-हाल : connoisseur
my lips were sealed but my expressions were total transparent to every connoisseur of the town

चेहरा-ओ-नाम एक साथ आज ना याद आ सके
वक़्त ने किस शबीह को ख्वाबो-ओ-ख्याल कर दिया

10. शबीह : resemblance , image , picture

could not recollect face & name simultaneously , time in separation faded memory of beloved.

मुद्दतों बाद उसने आज मुझसे कोई गिला किया
मनसब-ऐ-दिलबरी पे क्या मुझको बहाल कर दिया

11. मनसब-ऐ-दिलबरी : Stage of Loving

after a long time ,beloved blamed , this gesture at this stage of loving has restored my faith????

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Translated by Kapil Jain with the help of Rekhta link

https://rekhta.org/ghazals/chalne-kaa-hausla-nahiin-ruknaa-muhaal-kar-diyaa-parveen-shakir-ghazals