Saturday, January 13, 2018

'फ़िराक़' अक्सर बदल कर भेस मिलता है कोई काफ़िर, कभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं..




'फ़िराक़' अक्सर बदल कर भेस मिलता है
कोई काफ़िर,
कभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं..
....फ़िराक़ गोरखपुरी

'Forest Tryst in Disguise' , 1903
Painting by Edmund Leighton, 
British, 1852 - 1922
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'फ़िराक़' अक्सर बदल कर भेस मिलता है
कोई काफ़िर,
कभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं..

भेस : disguise, dress

काफ़िर : sweetheart , माशूक़ा , infidel, impious person, प्रेमपात्र, , असमर्थ, अपात्र

जान : a friend, a lover, of the heart or soul, of or relating to life

पहचान : acquaintance, recognize, identify, descry , sign, distinction

This Couplet is the classic example of signature style with enormous complexity of the legendary Poet Firaq Gorakhpuri Sahib.

Literally meaning :
Firaq ( Firaq Gorakhpuri : The Poet blaming himself for identifying the indifferent attitude ) that the beloved ( referred as काफ़िर : who don't want to show her acquaintance openly , but loves him in her heart ) sometimes treats him as a friend ( जान ) and At times only as acquainted ( पहचान : a person one knows slightly, but who is not a close friend. )

Real meaning :
Firaq ( poet himself ) is confound with the bewildered behavior of the beloved ( काफ़िर ) where sometimes she pretend to be a close friend ( जान ) , but At times only as a distant known ( पहचान ), this perplexed behavior ( referred as : अक्सर बदल कर भेस : disguise ) is causing anxiety.

Thursday, January 4, 2018

देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़




देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़
इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है
.... ग़ालिब

उश्शाक़ : प्रेमी , lovers
बुतों : idols, beloved ones
फ़ैज़ : success, grace, फ़ायदा, कृपा
बरहमन : Brahmin, Hindu Priest, fortune teller

Let's see what favors Beloved gives to me, As Fortune Teller predict this year is very good for my successes.

Saturday, December 23, 2017

Yours embrace heat is my grace



Good Morning Sunday,

तेरी आग़ोश की पुर-नूर दहक मेरी अमानत
मेरी आग़ोश का पुरसुकूँ अमान तेरी अमानत
.....कपिल जैन



English : The Falconer, 1863
Painting by Tranquillo Cremona,
Italian, 1837 - 1878
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तेरी आग़ोश की पुर-नूर दहक मेरी अमानत
मेरी आग़ोश का पुरसुकूँ अमान तेरी अमानत
.....कपिल जैन

Yours embrace heat is my grace,
My protection gurantee is your grace.

आग़ोश : embrace , आलिंगन
पुर-नूर : gracious, enlightened
दहक : heat , intense , गर्म
अमानत : किसी और का कीमती सामान
पुर-सुकूँ : peaceful
अमान : protection , security
grace : courteous good will

Thursday, June 22, 2017

Sun Charkhe Di Mithi Mithi Hook" Sung by Ustad Nusrat Fateh Ali Khan Sahib

Kapil Jain's Understanding & Translation of "Sun Charkhe Di Mithi Mithi Hook"
Sung by Ustad Nusrat Fateh Ali Khan Sahib, Poet : Unknown, seems to be a folklore ( further update Welcome )

सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा
मेरे दिल विचहो उठती ऐ हूँक
माहिया मैनू याद आवंदा

मेरी ईद वाला चन कदों चढ़ेगा
अल्लाह जाने माही कदों वेडे वड़ेगा
दुख ढाडे ने ते , ज़िन्दहि मलूक

माही आवेगा ते , खुशियाँ मनवांगी ,
उदेहे राहाँ विच अखियाँ विछावंगी ,
जाँन छडीये है विछोरोएँ ने फूंक ,

ताने मारदे ने अपने शरिक वे
लिख चिट्ठी विच औन दी तरिक वे
काली रात वाली डंगे मैनु शूक

कता पूरियाँ ते हंजु मेरे वघदे
हुन हासे वि नही मैनू चंगे लगदे
किवेएँ भुल जवां उदे मैं सलूक

सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा

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सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा
मेरे दिल विचहो उठती ऐ हूँक
माहिया मैनू याद आवंदा

Sweet melodious sound of spinning wheel reminds me of my beloved , who is away from home , it erupts  inconsolable feeling of remembrance of my beloved

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मेरी ईद वाला चन कदों चढ़ेगा
अल्लाह जाने माही कदों वेडे वड़ेगा
दुख ढाडे ने ते , ज़िन्दहि मलूक

When the moon ( beloved )  sighting signling the beginning of celebrations will appear ? God knows , when beloved enters back in home ? Enormous suffrings , life like a hell without beloved

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माही आवेगा ते , खुशियाँ मनवांगी ,
उदेहे राहाँ विच अखियाँ विछावंगी ,
जाँन छडीये है विछोरोएँ ने फूंक

Will celebrate when beloved return ,
Will lay down my eyes to decorate the return passage  ,  soul almost burned in the intense heat of separation.

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ताने मारदे ने अपने शरिक वे
लिख चिट्ठी विच औन दी तरिक वे
काली रात वाली डंगे मैनु शूक

Consistent teasing by relatives , please write back the date of your return , each black night ( night without beloved ) bites me with venom.

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कता पूरियाँ ते हंजु मेरे वघदे
हुन हासे वि नही मैनू चंगे लगदे
किवेएँ भुल जवां उदे मैं सलूक

While spinning the wheel , my tears were unstoppable , these days laughter hurts enormously  , how could I forget beloved's behaviour.

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सुन चरख़े दी मिठ्ठी मिठ्ठी कूक
माहिया मैनू याद आवंदा
मेरे दिल विचहो उठती ऐ हूँक
माहिया मैनू याद आवंदा

Sweet melodious sound of spinning wheel reminds me of my beloved , who is away from home , it erupts  inconsolable feeling of remembrance of my beloved

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Kapil Jain
Kapilrishabh@gmail.com
Jun, 22,  2017
Noida, Uttar Pradesh, India

Thursday, June 15, 2017

Aadhaar Biometric Data, lock / unlock ? When? Why? Where?

Aadhaar Biometric Data, lock / unlock ?  When?  Why?  Where?

Sharing From my own today's experience,
As a new era of Aadhar linked biometric verification begins & we all are not very familiar with the nuance or finer aspects of these verification, if misused, can cause us financial loss etc. etc., flip side is if we want to get these verified but failed then also a big problem.

Today's Example
Now as per Govt., Now it is mandatory to link Mobile Sim with Aadhaar,

Today my finger print matching failed  Both at Airtel as well as on Vodafone ( as my two numbers) ,

Reason being :
Because I have locked myself earlier ( way back about two years due to some media reports about data theft ) on the Aadhar website link below, but funny part is, I just forgot that I have locked biometric verification myself,

After a detailed web surfing found my own fault, then I have unlocked biometric verification on the same website,

Now My Mobile Sim linked with Aadhar properly,

https://resident.uidai.gov.in/biometric-lock
_________________
Summery :

Lock : to prevent misuse

Unlock before : if want to verify your own details somewhere.
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Your Aadhar details must have

1. Your Mobile number ( for OTP )

2. Your E MAIL ID

___________________

Thanks
Kapil Jain
Kapilrishabh@gmail.com

15.06.2017

Sunday, May 21, 2017

Bharti Ji

कुछ हम क़दम बढ़ाते , कुछ तुम क़रीब आते ,
फ़ासले ज़्यादा ना थे, नीयत से ही मिट जाते !
     Bharti Chopra Ji

Sunday, May 14, 2017

Kapil's Story : Ranjish hi Sahi , Dil hi Dukhane ke liye Aaa

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Kapil's Story : Ranjish hi Sahi , Dil hi Dukhane ke liye Aaa ,
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिऐ आ

राजन तुम मुझसे सत्रह साल छोटे हो , जब आखिर बार तुम आये तो तुम्हे वो बात नही कहनी चाहिये थी , माँ ने मामा को गिला शिक़वे के लहज़े में कहा , अभी मामा जी को आये पाँच मिनट भी नही हुए थे , सिर्फ पानी ही उनकी ख़ातिर में आया था , मामा जी ने माँ के लहज़े मे झुपी नाराज़गी को तुरंत भाँपते हुए पूछा , कौन सी बात बहनजी ? , मै कुछ समझा नही , वो हैरान परेशान , तब तक माँ भी भूल गयी कौन सी बात , बोली खैर छोड़ो उस बात को , यह बताओ , तुम इतने इतने दिन हो जाते है मिलने भी नही आते ,  मामा जी बोले बहनजी अभी पिछले महीने ही तो आया था , राजन अब तुम भी मुझे दिन गिना रहे हो , यह अब तक का तीसरा गिला शिकवा था माँ का मामा जी के प्रति , जिनका आगमन हुए अभी सिर्फ दस मिनट ही हुऐ थे ।

मुझे बहन-भाई के इस बातचीत का कोई सिर पैर नज़र नही आ रहा था , मैने बीच में टपकते हुऐ पूछा मामा जी आप क्या लेंगे ? मामाजी जवाब देते इससे पहले ही माँ  मुझसे बोली कामिनी को बोलो , ठंडा आम का पन्ना जो मैने बनवाया है ख़ास राजन के लिये , वो लाये , और कुछ फल कटवाओ , कितनी गर्मी में राजन आया है , उसके बाद , खाना भी , आज सिर्फ राजन की पसंद का बनवाया है , दही भल्ले इत्यादि , अब हैरान परेशान होने की मेरी बारी थी , कि माँ अपने भाई को दुलार कर रही है या गुस्सा , मामाजी परेशान हो चुके थे , उनको कुछ समझ नही आ रहा था कि उनसे कौन सी बात , कब गलत हो गयी , अपनी बड़ी बहन के प्रति | मुझको बोले कपिल , मैने बहनजी को पिछली शाम ही फ़ोन करके बताया था कि कल इतवार है , मै ग्यारह बजे आपसे मिलने नोएडा आऊंगा , उन्होंने कहा , लंच साथ करेंगे , बहुत ही ख़ुश थी फ़ोन पर | मुझे याद ही नही आ रहा कि मुझसे कोई सी बात गलत हो गयी , जिसका ज़िक्र बहनजी कर रही है , मामाजी के दबे कुचले लहज़े मे एक मासूम सी शर्मिन्दगी लिए माफ़ी की गुज़ारिश थी , जो दिल को दहलाने की कैफ़ियत रखती थी , मैने उनके दिल का मर्म समझते हुऐ कहा , मामाजी , ऐसी कोई बात नही है , तब तक माहौल पटरी से उतर चुका था , मामाजी का मूड ख़राब सा हो गया था , अपने भाई का उतरा चेहरा देख , माँ तुरंत बड़ी बहन की मुद्रा में बोली , राजन , आम का पन्ना लो इत्यादि इत्यादि , सब बेअसर,  उसके बाद मामाजी एक डेढ घंट बामुश्किल गुजारा , और भारी मन से चले गये ।

पिछले एक महीने मे लगभग तीसरी चौथी बार , यही नाटकीय परिस्थिति , क़िरदार बदल बदल के हुई , रीता दीदी , सुजाता दीदी , कांता मौसी , और आज राजन मामाजी , सब आये बढ़िया मूड़ में माँ से मिलने , सबकी आने की इत्तला पहले से थी , उनके आते ही माँ द्वारा उनके प्रति शिकायतों का अंबार , इसके बाद उनके पसंदीदा व्यंजओ से सजी टेबल और उनका भारी मन से अपने घर के लिये प्रस्थान , और उसी शाम उसी क़िरदार से फ़ोन पर लंबी बात जिसमे माँ का पूरी तरह वात्सल्यता से परिपूर्ण , आशीर्वादों से भरा और उस क़िरदार की तारीफों का तांता , घण्टों चलते फ़ोन से उस दिन का अंत , मेरे अनुमान अनुसार उस क़िरदार का वो सारा दिन बर्बाद , ना तो वो माँ को कुछ कह सके , ना कुछ कर सके , इधर माँ को उस शाम को बैचैनी की , मैंने उस क़िरदार को क्यों इतनी बाद सुनाई ।

बकौल फैज़ अहमद फैज़ ,
’वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था ,
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है ,

घर का सारा माहौल बहुत ही बोझिल था , एक अजीब सी किचकीची फिज़ा मे थी , माँ तो कभी भी ऐसी नही थी , यह सारी समस्या लगभग पिछले एक महीने के करीब मे उजागर हुई है , क्या कारण है कोई पता नही , अभी हाल ही मे हुई सारी मेडिकल रिपोर्टो में सभी कुछ ठीक आया है , उसके बावजूद सब गड़बड़ थी ।

पच्चीस तीस दिन और गुजरे होंगे , शाम ओखला फैक्ट्री से नोएडा घर आ रहा था , जाने क्यों इतना ट्रैफिक जाम लगा था , कार का सीडी प्लेयर ऑन किया मिक्स्ड ग़ज़लों की सीडी थी , दो तीन ग़ज़ले निकली होंगी की मेहंदी हसन साहिब की दिलकश मखमली आवाज़ मे बीसियों साल पुरानी मेरी पसंदीदा ग़ज़ल अहमद फ़राज़ कृत

'रंजिश ही सही , दिल ही दुखने के लिये आ' ’
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ'

बजने लगी , यह ग़ज़ल मैने अब तक ज़्यादा नही तो भी पचासियों बार सुनी होगी ,

कुछ तो मेरे पिंदारे मोहब्बत का भ्रम रख ,
तू मुझ से खफ़ा है तो ज़माने के लिऐ आ

(पिंदारे : self esteem
At least have some consideration of my esteem my pride , even if you are annoyed with me , even than come due to social obligations.)

जैसे ही गज़ल का यह शेर बजा , एक बिजली सी कौंधी दिल में , यही हो रहा है माँ के साथ , यही हो रहा है माँ के साथ , बस यही हो रहा है , मसले का हल मिलता दिखाई दिया , अब तक ट्रैफिक जाम में धीरे धीरे से कार आगे बढ़ रही थी , पर अब प्राथमिकता इस जवलंत मसले का हल ढूंढ़ना था , मैने कार को जग़ह देख के साइड लगाया , गज़ल को ध्यानपूर्वक फ़िर सुना ,  बीसियों साल मे पहली बार समझ आयी इस ग़ज़ल की बुलंदी ,

इस ग़ज़ल मे शायर अहमद फ़राज़ ने एक ख़ास मानसिक परिस्तिथियों को इस खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है , जिसमे अकेलापन एक व्यकित्व को घेर लेता है , व्यक्ति  बिल्कुल अनजाने में इस सिंड्रोम में घिर जाता है , और दूसरे किसी भी व्यक्ति से मनमुटाव शिक़वे शिकायत इसलिये कर लेता है , कि सुलह सफ़ाई के बहाने कुछ वक्त तो और साथ व्यतीत होगा , अब मुझे सारी समस्या और हल साफ़ दिख रहे थे ।

पिछले दो महीनों से माँ के पैरों का दर्द कुछ बढ़ सा गया था, जिसकी वजह से उनका अपने कमरे से डाईनिंग टेबल तक आकर खाना लेने की हिम्मत भी कुछ टूट सी गयी थी , पहले हम सुबह का नाश्ता डाइनिंग टेबल पर साथ करते थे जिसमे कम से कम आधा घंटा साथ एन्जॉय करते थे , इस ही तरह उनका लंच डिनर भाभीजी कामिनी और बच्चों के साथ होता था , साथ बिताया समय हुआ लगभग ढाई तीन घंटे , बाकी बचे समय मे TV , किताब , इधर फ़ोन , उधर फ़ोन, बेटियां , नाती , पोते , भाई , भाभी , कहने का अर्थ सारा दिन बढ़िया गुजरता था , पर अब , नाश्ता लंच डिनर सब कमरे मे बेड पर , जिसका सीधा असर, साथ बिताते समय की ड्यूरेशन पर पड़ा जो ढाई तीन घंटे से घट कर आधा पौना घंटा रह गया , जिसका सीधा रिजल्ट था पिछले अंतरे में लिखित सिन्ड्रोम ।

सबको अनुरोध किया गया कि माँ के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय व्यतीत करे , सबने अपना अपना सहयोग देना शरू किया ,  देखते ही देखते वो दुःखद सिन्ड्रोम ग़ायब हो गया , उसके बाद माँ का फिर वही पुराने ख़ुशफ़हम व्यक्तित्व में वापस आ गयी ।

करीब दो साल बाद बयासी वर्ष की आयु मे , हॉस्पिटल के कमरे मे अपनी बहू , बेटी , नर्स और डॉक्टर साहिब से ख़ूब खिलखिलाते हुए बात करते हुऐ , एक शानदार स्वर्ग प्रस्थान प्राप्त किया , जाना सभी ने है , खिलखिलाते हुए शानदार पदवी के साथ , या ?

उसके बाद से आज तक अनगिनत बार फिर सुनी , वही ग़ज़ल  ’रंजिश ही सही , दिल ही दुखाने के लिये आ’ ,

शायर श्री अहमद फ़राज़ साहिब को सलाम
गायक श्री मेहँदी हसन साहिब को सलाम

कपिल जैन

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Kapil Jain
Kapulrishabh@gmail.com
Noida , U.P. , India
May 14 , 2017

(C) (P) (R) Reserved
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https://youtu.be/wRG2XJcmhDc

https://rekhta.org/ghazals/ranjish-hii-sahii-dil-hii-dukhaane-ke-liye-aa-ahmad-faraz-ghazals?lang=hi